हज़रत अली अकबर के जन्मदिवस के अवसर पर महिलाओं द्वारा महफ़िल का आयोजन
शहीदे करबला इमाम हुसैन के दूसरे बेटे, हमशक्ल पैगंबर (स.) जनाबे अली अकबर की वेलादत पर काली महल जेपी टावर में ख्वातीन ने महफिल का आयोजन किया।
भारत से अहलेबैत समाचार एजेंसी (अबना) संवाददाता ने अमर उजाला के हवाले से रिपोर्ट दी है कि शहीदे करबला इमाम हुसैन के दूसरे बेटे, हमशक्ल पैगंबर (स.) जनाबे अली अकबर की वेलादत पर काली महल जेपी टावर में ख्वातीन ने महफिल का आयोजन किया। महफिल हो खिताब करते हुए मोहतरमा रेहाना हुसैनी नौनहरवी ने बताया कि जनाबे अली अकबर की वेलादत 43 हिजरी में मदीने में हुई थी। आपकी परवरिश बचपन से ही इमाम हुसैन की बहन जनाबे जैनब और उनके भाई जनाबे अब्बास के हाथों हुई। इमाम हुसैन कहा करते थे कि जब मुझे अपने नाना (रसूल स.) की जियारत करनी होती थी तो मैं अपने इस बेटे को देख लिया करता था। करबला के शहीदों में भी जनाबे अली अकबर का नुमायां किरदार है। जनाबे अली अकबर 18 वर्ष की उम्र में करबला में शहीद हुए थे। महफिल का आगाज नुजहत फातमा ने तिलावते कुरान पाक ने किया। तबस्सुम हैदर और माहे तलत आसिफ ने कलाम पेश किए। इस मौके पर कमर अबरार, शमीम फातमा, निलोफर रजा वगैरह मौजूद रहीं। उधर घरों में अली अकबर के नाम से नज्र भी दिलाई गई।