बहरैन में जनता के दमन पर अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों का मौन।
बहरैन में जनता की मांग पर ध्यान दिए जाने पर आधारित संयुक्त राष्ट्र संघ के अनुरोध के बावजूद आले ख़लीफ़ा शासन द्वारा राजनैतिक कार्यकर्ताओं की गिरफ़तारी व बंदियों को यातना का क्रम जारी है। बहरैन के विपक्ष के नेता हसन अलमुशैमा के बड़े बेटे अली मुशैमा ने बताया कि उनके पिता वृद्ध होने के बावजूद जेल में हैं और उन्हें यातनाएं दी जा रही हैं। अली मुशैमा ने कहा कि उनके पिता कैंसर के रोगी हैं किन्तु आले ख़लीफ़ा शासन के तत्व पूरे दिन हसन अलमुशैमा की आंख और हाथों को बांधे रखते हैं और ज़मीन पर लिटा कर उन्हें लात मारते हैं। अली मुशैमा ने बल दिया कि बहरैन के सुरक्षा बल बंदियों से उगलवाने के लिए उनके निर्वस्त्र शरीर पर ठंडा पानी डालते हैं और फिर कूलर की ठंगी हवा सामने खड़ा कर देते हैं जिसके कारण बंदी कड़ाके की ठंड से कांपते हैं। बहरैनी शासन की आलोचना में एक शेर पढ़ने के कारण इस देश की जेल में कुछ समय के लिए बंद बहरैनी शायरा आयात अलक़िरमेज़ी ने रहस्योदघाटन करते हुए बताया कि जेल में उन्हें मारा पीटा गया, गाली दी गयी, बिजली के शाक लगाए गए और यौन दुराचार की धमकी दी गयी। अलक़िरमेज़ी कहती हैं कि बहरैन में बंदियों को मारना, उन्हें गाली देना तथा बिजली के झटके देना, यातना देने की एक आम शैली है। , बहरैन के सबसे बड़े धड़े अलवेफ़ाक़ के सदस्य हादी अलमूसवी ने कहा कि एमनेस्टी इंटरनेश्नल या ह्यूमन राइट्स वॉच जैसे अंतर्राष्ट्रीय संगठन अपने प्रतिनिधि बहरैन भेज कर इस देश के राजनैतिक बंदियों की स्थिति की निकट से समीक्षा कर सकते हैं और यह देख सकते हैं कि आले ख़लीफ़ा शासन राजनैतिक बंदियों के साथ कैसा व्यवहार कर रहा है और राजनैतिक बंदियों के शरीर या जेल में शहीद होने वालों के शरीर पर यातनाओं के निशान देख सकते हैं। वास्तविकता यह है कि जो कुछ आले ख़लीफ़ा शासन की जेल में घट रहा है वह मानवता के विरुद्ध अपराध व मानवाधिकार के उल्लंघन का खुला उदाहरण है किन्तु अभी तक किसी भी अंतर्राष्ट्रीय संगठन ने बहरैन के अधिकारियों के अमानवीय कृत्य के विरुद्ध कोई गंभीर क़दम नहीं उठाया जिससे इन संगठनों की योग्यता पर प्रश्न उठ रहा है।(एरिब डाट आई आर के धन्यवाद के साथ).