सीरिया पर दबाव डालने का नया पैंतरा
कोड: 284110 दिनांक: 2011/12/14स्रोत: एरिब डाट आई आरprint

सीरिया पर दबाव डालने का नया पैंतरा


 सीरिया पर दबाव डालने का नया पैंतरा

संयुक्त राष्ट्रसंघ के मानवाधिकार परिषद के प्रमुख navi pillay ने कल न्यूयार्क में इस परिषद के सदस्य देशों के मध्य प्रस्ताव दिया कि सीरिया और इस देश के विरोधियों के साथ दमिश्क सरकार की कार्यवाहियों की फाइल को अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में पेश किया जाये। पश्चिमी देशों ने सीरिया पर दबाव डालने के लिए सुरक्षा परिषद में एक प्रस्ताव पेश किया था परंतु रूस और चीन ने इस प्रस्ताव को वीटो कर दिया जिसके कारण सीरिया विरोधी प्रस्ताव पारित नहीं हो सका था। पश्चिमी देशों को जब इसमें विफलता का सामना करना पड़ा तो उन्होंने सीरिया के राष्ट्रपति बश्शार असद पर दबाव डालने के लिए दूसरा पैंतरा बदला। यदि अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में सीरिया की भर्त्सना पर आधारित आदेश जारी होता है तो दमिश्क के अधिकारियों को युद्धअपराधी कहा जायेगा और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उनकी सरकार अलग- थलग पड़ जायेगी तथा यह दबाव सीरिया में सैनिक हस्तक्षेप के लिए भूमि प्रशस्त करेगा। इस आधार पर पश्चिम ने सीरिया के विरुद्ध अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय को सक्रिय बनाने के navi pillay के सुझाव का स्वागत किया है परंतु सीरिया ने पश्चिम के सुझाव को रद्द कर दिया है। रूस के विदेश उपमंत्री Gennady gatilov ने समाचार एजेन्सी इतारतास के साथ साक्षात्कार में कहा है कि सीरिया की फाइल को अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में भेजना अनैतिक है। Gennady gatilov ने बल देकर कहा है कि केवल सुरक्षा परिषद किसी देश की फाइल को अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में भेज सकती है। रूस के विदेश उपमंत्री का बयान वास्तव में मास्को द्वारा वीटो किये जाने की ओर संकेत है। Gennady gatilov ने कहा कि रूस भी सीरिया के परिवर्तनों पर चिंतित है परंतु वह सीरिया की सरकार को गत ९ महीनों के दौरान होने वाली समस्त हत्याओं के लिए ज़िम्मेदार नहीं मानता। सीरिया के राष्ट्रपति बश्शार असद ने घोषणा की है कि मारे जाने वाले लोगों के मध्य सरकार के कई सौ वफादार सैनिक एवं सुरक्षा कर्मी भी मारे गये हैं। यहां पर प्रश्न यह उठता है कि अमेरिका और पश्चिमी देशों को सीरिया में ही क्यों अशांति दिखाई देती है? उन्हें सीरिया के राष्ट्रपति बश्शार असद के समर्थन में होने वाले प्रदर्शन क्यों नहीं दिखाई देते? वे क्यों इस पर कुछ नहीं बोलते जबकि यमन, बहरैन और स्वयं सऊदी अरब में लोगों का दमन यथावत जारी है। वास्तविकता यह है कि पश्चिमी देशों के हित बहरैन, यमन और सऊदी अरब के तानाशाहों की सुरक्षा में नीहित हैं इसलिए उन्हें इन देशों में होने वाले प्रदर्शन दिखाई नहीं देते।

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