भयभीत है आले ख़लीफ़ा शासन
कोड: 318787 दिनांक: 2012/05/30 - 19:06स्रोत: print

भयभीत है आले ख़लीफ़ा शासन

आले ख़लीफा शासन निरंतर संचार माध्यमों विशेषकर ईरानी संचार माध्यमों में अपने अत्याचारों के रहस्योदघाटन से बौखलाहट में है इसी लिए उसने बहैरैन में अरब सैट के कार्यक्रमों को बंद करने का निर्णय लिया है............ 

 भयभीत है आले ख़लीफ़ा शासन
बहरैन से प्राप्त ताज़ा सूचनाओं के अनुसार इस देश में आले ख़लीफा शासन के विरुद्ध जन प्रदर्शनों में अभूतपूर्व वृद्धि से भयभीत होकर वहां के तानाशाह ने अरब सैट उपग्रह पर अपने कार्यक्रमों को बंद करने का निर्णय लिया है। 
आले ख़लीफा द्वारा महिलाओं की गिरफ्तारी का विरोध करने हेतु बड़ी संख्या में युवा रविवार की सुबह से ही अल बिलादुल क़दीम क्षेत्र में एकत्रित हो गये थे और उन्होंने मलिक फ़हद पुल की ओर जाने वाली मुख्य सड़क को बंद कर दिया। 
इसी प्रकार क्रांतिकारियों ने अस्सहला और शहरकान को जाने वाली मुख्य सड़कों पर नियंत्रण कर लिया और वहां गाड़ियों के टायर इकट्ठे कर उनमें आग लगादी जिसके कारण पूरे क्षेत्र को धुएं के गोलो ने अपनी चपेट में ले लिया।
आले ख़लीफ़ा शासन के सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध शक्ति का प्रयोग करते हुए उनकी ओर गोली बारी की तथा हेलिकाप्टर से क्रांतिकारियों का पीछा किया।
इसी बीच बहरैन की विफ़ाक़ पार्टी के महासचिव ख़लील अल मरज़ूक़ ने कहा है कि जेनेवा में मानवाधिकार परिषद के लगभग 46 सदस्य देशों ने बहरैन में मानवाधिकारों की स्थिति की समीक्षा करने का अनुरोध किया है जिससे यह सिद्ध होता है कि बहरैन के क्रांतिकारियों का ख़ून आवश्यक रंग लायेगा और यह देश मानवता पर अत्याचारों के स्थान पर मानवता का सेवक बन जायेगा।
अल मरज़ूक़ ने उल्लेख किया कि यह महत्वपूर्ण घटना जन क्रांति की सफलता का पहला ज़ीना है। निश्चित ही आले ख़लीफ़ा शासन काल की उलटी गिन्ती शुरू हो गयी है और बहरैन की जनता अपने अधिकारों को प्राप्त करके ही दम लेगी।
आले ख़लीफा शासन निरंतर संचार माध्यमों विशेषकर ईरानी संचार माध्यमों में अपने अत्याचारों के रहस्योदघाटन से बौखलाहट में है इसी लिए उसने बहैरैन में अरब सैट के कार्यक्रमों को बंद करने का निर्णय लिया है.
इस बीच बहरैन में आले ख़लीफा शासन के विरूद्ध 8 प्रदर्शनकारियों को विरोध प्रदर्शन करने के आरोप में 15 वर्ष की क़ैद की सज़ा सुनाई गयी है। इन आठ लोगों पर यह भी आरोप है कि उन्होंने ईरान की सहायता से सरकार गिराने का प्रयास किया है।
हालिया दिनों में आले ख़लीफा शासन द्वारा बौखलाहट में उठाये जा रहे क़दमों से ऐसा प्रतीत होता है कि यह शासन पहले से कहीं अधिक निराशा में है और शासन पर उसकी पकड़ काफ़ी ढीली हो चुकी है।
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