हिजाज़ की स्वतंत्रता के लिए गठित कमेटी अख़वानुल मोमिनीन ने अपने बयान में कहा है कि इस्लामी देश में रहने वाले लोगों का स्वाभाविक अधिकार है कि वह अपने भाग्य का फ़ैसला स्वंय करें।
इस बयान में कहा गया है कि इस्लामी धरती जिसे ख़ुदा वन्दे आलम ने हरमैन शरीफ़ेन (मक्का व मदीना) के सदके में सम्मान दिया है, सत्ता का शांतिपूर्ण हस्तांतरण, धन का उचित वितरण, अन्याय का अंत और विभिन्न देशों के साथ मज़बूत संबंधों की स्थापना, इस धरती के बासियों का स्वाभाविक अधिकार है। अख़वानुल मोमिनीन ने अपने बयान में जोर दे कर कहा है कि हिजाज़ की स्वतंत्रता के लिए गठित कमेटी अख़वानुल मोमिनीन एक परिवर्तन चाहने वाली इस्लामी गठबंधन का नाम है और यह परिवर्तन तभी वास्तविकता का रूप धारण करेगा जब इस्लामी जगत में सभी अपराध और आतंकवाद का स्रोत यानी ऑले सऊद सरकार बदल दी जाए या वह खुद संन्यास ले ले। और देश की सत्ता इस देश के मुस्लिम लोगों के सुपुर्द कर दी जाए।
इख़्वानुल मुस्लेमीन के बयान में कहा गया है कि यह संगठन अपने खुफिया आंदोलन की शुरुआत कर चुकी है और अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए संघर्ष करेगी और आंदोलन वापसी की कोई सम्भावना नहीं है।
उल्लेखनीय है कि सऊदी अरब के पूर्वी क्षेत्रों में आले सऊद शाही सरकार के विरुद्ध जनता का आंदोलन कई महीनों से जारी है।
सूचना के अनुसार पूर्वी क्षेत्रों में जनता ने राजनेताओं की अपील पर अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए लगातार प्रदर्शन किए हैं। प्रदर्शनकारी शाही सरकार की हिंसक कार्यवाहियों के विरोध में नारे लगाते हैं और राजनैतिक क़ैदियों की रिहाई की मांग करते हैं। प्राप्त सूचना के अनुसार सऊदी अरब के पूर्वी क्षेत्रों में फ़रवरी 2011 से प्रदर्शनों का क्रम जारी है जिसे शाही सरकार ने शक्ति से कुचलने का प्रयास किया है किंतु उसे सफलता नहीं मिली है।
ज्ञात रहे इससे पूर्व सऊदी अरब के एक राजनैतिक कार्यकर्ता फ़ोआद इब्राहीम ने कहा था कि आले सऊद शासन, पश्चिम के समर्थन से इस देश में मानवाधिकारों का उल्लंघन कर रहा है। फ़ोआद इब्राहीम ने अल-आलम टीवी चैनल से विशेष साक्षात्कार में स्पष्ट किया था कि आले सऊद शासन पश्चिमी देशों के समर्थन और उनकी मानवाधिकार के संबंध में दोहरी नीति के आड़ में सऊदी अरब में मानवाधिकार का उल्लंघन जारी रखे हुए है। उन्होंने इस बात की ओर संकेत करते हुए कि आले सऊद शासन पश्चिमी देशों के समर्थन से सऊदी अरब की जेलों में बंदियों से संबंधित एम्नेस्टी इंटरनेश्नल के प्रश्नों का उत्तर नहीं दे रहा है बल दिया कि सऊदी अरब की सत्ता पर मौजूद शासन मानवाधिकारों को कोई महत्व नहीं देता और मानवाधिकारों के नारे को अपने राजनैतिक लक्ष्यों के लिए प्रयोग करता है। एम्नेस्टी इंटरनेश्नल ने सऊदी अरब में मानवाधिकारों की समीक्षा के लिए एक बैठक के दौरान आले सऊद शासन द्वारा मानवाधिकारों के उल्लंघन और प्रदर्शन करने वालों के दमन की निंदा की थी। सऊदी अरब के राजनैतिक कार्यकर्ता इब्राहीम फ़ोआद ने स्पष्ट किया था कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों मे पुलिस के हाथों 8 व्यक्तियों की हत्या और दस लोगों के घायल होने के मामले की जांच के लिए अभी तक कोई जांच समिति गठित नहीं हुई है और सैकड़ों सऊदी नागरिकों को केवल शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में भाग लेने के आरोप में जेलों में बंद कर दिया गया है।
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