जमीअत मुसलमानाने हिंद के अध्यक्ष प्रोफेसर बसीर अहमद खान ने म्यांमार में मुसलमानों के नरसंहार को तुरंत रोके जाने पर बल दिया है।
प्रोफेसर बसीर अहमद खान ने आज नई दिल्ली में इरना से बातचीत में म्यांमार में मुसलमानों के नरसंहार की निंदा की। उन्होंने कहा कि म्यांमार में मुसलमानों पर किए जाने वाले अत्याचारों से मुसलमानों की भावनाओं आहत हुई हैं। अफसोस की बात यह है कि विश्व समुदाय विशेषकर मानवाधिकार संगठन इन अत्याचारों पर खामोश बैठे हैं। उधर उलेमाए अल-अज़हर ने भी एक बयान जारी करके मुसलमानों से अपील की है कि म्यांमार में मुसलमानों के नरसंहार और उन पर किए जाने वाले अत्याचारों के खिलाफ विभिन्न देशों में म्यांमार के दूतावासों का घेराव किया जाए। एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वाच ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि म्यांमार की सेना और पुलिस ने दसियों हज़ार मुसलमानों को घरों से निकाल कर उनके घर ध्वस्त कर दिए हैं। म्यांमार के मुसलमान सरकारी हिंसा से तंग आकर बांग्लादेश फरार कर रहे हैं। म्यांमार सरकार ने मुसलमानों के अधिकारों का इंकार करते हुए कहा कि मुसलमानों की समस्या हल करने का एकमात्र मार्ग उन्हें शरणार्थी शिविरों में बसाना है। म्यांमार में लगभग दस लाख मुसलमान हैं। इस्लामी सहयोग संगठन ने भी म्यांमार में मुसलमानों के नरसंहार की निंदा की है।
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