कूफ़े वालों के इमाम हुसैन (अ.) के नाम ख़त और हुसैन (अ.) का जवाब
कोड: 282334 दिनांक: 2011/12/05स्रोत: राष्ट्र निहित हिन्दी साप्ताहिक- मोहर्रम नम्बरprint

कूफ़े वालों के इमाम हुसैन (अ.) के नाम ख़त और हुसैन (अ.) का जवाब


 कूफ़े वालों के इमाम हुसैन (अ.) के नाम ख़त और हुसैन (अ.) का जवाब
अल्लाह के नाम से जो रहमान और रहीम है, यह ख़त हुसैन इब्ने अली अ. के लिए सुलेमान बिन सुरद, अल मुसय्यब बिन नजबा, रिफ़ा बिन शद्दाद, हबीब बिन मज़ाहिर और कूफ़े के शियों की तरफ़ से है। सलाम हम्द उस ख़ुदा कि जिसका कोई शरीक नहीं और उसी का शुक्र है कि उसने आपके उस दुश्मन (माविया) को ख़तम कर दिया जो क़ौम पर ज़बरदस्ती ग़ालिब हो गया था और हुकूमत पर क़ब्ज़ा कर लिया था। उसने अच्छे नेक लोगों को क़त्ल किया और बुरे लोगों को छोड़ रखा। उसने अल्लाह के माल को ज़ालिम और अमीर लोगों में बांट दिया। वह ख़त्म हो गया। यहां हमारा कोई इमाम नहीं है इसलिए आप यहां आ जाइए ताकि आपके ज़रिए मे अल्लाह सच्चाई के रास्ते में हमें एक साथ कर दे। नोमान बिन बशीर जोकि गवर्नर की जगह पर है, हम उसके साथ जुमे की नमाज़ में शरीक नहीं होते हैं और मस्जिद के बाहर भी उसका साथ नहीं देते हैं। अगर हमें पता चल जाए कि आप हमारे पास आ रहे हैं तो हम उसे बाहर निकाल दें और शाम (सारिया) तक उसका पीछा करें।
यह ख़त अब्दुल्लाह बिन मुसमा अल हमदानी और अबदुल्लाह बिन वलीन के हाथ रवाना किया गया और इन लोगों को हुक्म दिया गया कि यह ख़त फ़ौरन पहुंचाया जाए, यह लोग इस ख़त को लेकर इमाम हुसैन अ. के पास मक्का पहुंचे। इन दोनों को भेजने के दो दिन बाद कूफ़े वालों नें अब्दुल्लाह और अब्दुर्हमान को इमाम हुसैन अ. के पास भेजा, यह लोग अपने साथ तक़रीबन 150 ख़त लेकर गए। इनमें से कुच ख़त एक आदमी की तरफ़ से थे और कुछ दो चार आदमियों की तरफ़ से थे। फिर दो दिन बाद कूफ़े से हानी और सईद एक ख़त लेकर इमाम हुसैन अ. के पास आए जिसमें लिखा था-
अल्लाह के नाम के सात जो रहमान और रहीम है। यह ख़त अल हुसैन इब्ने अली अ. के लिए कूफ़े के मोमिनीन और शिया मुसलमानों की तरफ़ से है। जल्दी कीजए लोग आपका इन्तेज़ार कर रहे हैं, उनके पास आपके अलावा कोई रास्ता नहीं है इसलिए जल्दी की कीजिए बहुत बहुत जल्दी कीजिए। वस्सलाम।
 कूफ़े वालों ने एक ख़त में इमाम हुसैन अ. को लिखा- खजूर के बाग़ हरे हैं, फल पक गए हैं, इसलिए अगर आप यहां आना चाहें तो यहां के सिपाही साथ होंगे। सलाम।
हुसैन (अ.) का कूफ़ियों को जवाबी ख़त 
शुरू करता हूँ अल्लाह के नाम से जो रहमान और रहीम है। यह ख़त हुसैन इब्ने अली की तरफ़ से मोमिनीन के सरदारों और मुसलमानों के लिए। हानी और सईद तुम्हारे ख़त लेकर मेरे पास आए। यह तुम्हारे आख़िरी क़ासिद दैं जो हमारे पास आए। मौं समझ गया हूँ जिसका तुमने ख़ुलासा और ज़िक्र किया है। इसमें जो ख़ास बात तुमनें लिखी है वह यह है कि, यहां कोई इमाम नहीं है इसलिए आप यहां आ जाइए ताकि आपके ज़रिए से अल्लाह हमें हक़ और हिदायत के रास्ते पर यकजा कर दे। मैं अपने भाई मुस्लिम इब्ने अक़ील को भेज रहा हूँ, जो मेरे चचा ज़ाद भाई और मेरी तरफ़ से भरोसेमंद नुमाइंदे भी। अगर इन्होने मुझे यह लिखा कि तुम्हारे सरदार और बुज़ुर्ग भी वही चाहते हैं जैसा कि तुम्हारे क़ासिदों ने बयान किया है और जैसा कि तुम्हारे ख़ुतूत से ज़ाहिर होता है तो मैं इंशाअल्लाह जल्द ही तुम्हारे पास पहुँच जाउँगा। मेरे नज़दीक इमाम वह है जो क़ुरान के मुताबिक़ फ़ैसला करे, मीज़ाने अद्ल को क़ाएम करे, सच्चाई और अद्ल के रास्ते पर चले और अपने आप को पूरी तरह से अल्लाह की राह में वक़्फ़ कर दें।
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