| कोड: 287516 | दिनांक: 2011/12/30 | स्रोत: | print |
बहरैन की जनता की दुखद स्थिति |
अमरीकी संचार माध्यमों ने बहरैन की स्थिति के संबंध में अपनी रिपोर्टों में इस देश की सामाजिक स्थिति विशेष कर महिलाओं की स्थिति को अत्यंत दुखद बताया है। अमरीकी संचार माध्यमों ने उन देशों की स्थिति की समीक्षा में, जिनमें इस वर्ष इस्लामी जागरूकता की लहर आई है, बहरैन को दुख का द्वीप और वहां की महिलाओं को प्रतिरोधक बताया है। इन संचार माध्यमों ने स्पष्ट रूप से लिखा है कि बहरैन में सरकार विरोधी प्रदर्शनों में इस देश के सभी संप्रदाय शामिल हैं और पश्चिमी, अरब एवं बहरैनी संचार माध्यमों के इन दावों में कोई सच्चाई नहीं है कि प्रदर्शनों में केवल शीया मुसलमान ही भाग ले रहे हैं क्योंकि प्रदर्शनों में बड़ी संख्या में सुन्नी मुसलमान भी शामिल हैं। लगभग दस महीने पूर्व बहरैन में सरकार विरोधी प्रदर्शन आरंभ हुए थे। इस अवधि में बहरैन की आले ख़लीफ़ा सरकार ने सऊदी अरब की सहायता और प्रजातंत्र एवं मानवाधिकारों की रक्षा के दावेदारों के मौन के बीच प्रदर्शनकारियों के संबंध में अत्यंत हिंसक एवं पाश्विक व्यवहार अपनाया है। जीवन के अधिकार, यातनाओं पर रोक, धर्म की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे मानवाधिकार के मूल आधारों को, जिन पर अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संधियों में बल दिया गया है, बहरैन में आले ख़लीफ़ा सरकार तथा सऊदी अरब की सेना ने बड़ी निर्ममता से कुचला है। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को नौकरी से निकाल दिया गया है। बच्चों को यातनाएं देना तथा महिलाओं सहित आम नागरिकों को धमकी देना, आतंक उत्पन्न करने के हथकंडे के रूप में प्रचलित हो चुका है। डाक्टरों एवं नर्सों को अपने पेशेवराना दायित्व के निर्वाह और घायलों का उपचार करने के कारण गिरफ़्तार करके जेलों में डाला जा रहा है। बहरैनी महिलाओं को भारी शारीरिक यातनाओं के अतिरिक्त अपने पति या बच्चों की गिरफ़्तारी के कारण बहुत अधिक मानसिक दबाव सहन करना पड़ रहा है। इसी के साथ आले ख़लीफ़ा एवं सऊदी अरब के सैनिक उनका यौन उत्पीड़न भी कर रहे हैं। आज जो कुछ भी बहरैन में हो रहा है वह अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायालय के घोषणापत्र की धारा आठ के दूसरे अनुच्छेद के अनुसार युद्ध अपराध तथा धारा सात के अनुसर मानवता के विरुद्ध अपराध है। वर्ष 1949 में पारित होने वाले जेनेवा के चारों कन्वेन्शनों की तीसरी संयुक्त धारा के अनुसार भी ये कृत्य युद्ध अपराधों की परिधि में आते हैं। स्पष्ट है कि बहरैन में निहत्थी जनता के विरुद्ध, जो शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही है, इस देश की सरकार युद्ध अपराध जारी रखे हुए है। अमरीकी संचार माध्यम ऐसी स्थिति में बहरैन में मानवीय स्थिति को दुखद बता रहे हैं कि आले ख़लीफ़ा सरकार के हाथों जनता का पाश्विक दमन, युद्ध अपराधों व मानवता के विरुद्ध अपराधों पर दृष्टि रखने वाली अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं के मौन और इसी प्रकार राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद के कुछ स्थायी सदस्यों विशेष कर अमरीका के समर्थन की छाया में जारी है।(एरिब डाट आई आर के धन्यवाद के साथ)
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