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इस्लाम में आज़ादी 4
एक दूसरा संदेह यह पैदा किया जाता है कि इंसान क़ुरआन के अनुसार इलाही प्रतिनिधि है और इसका मतलब यह हैं कि इंसान ज़मीन पर अल्लाह तआला का उत्तराधिकारी है और अल्लाह तआला की तरह काम करता है जिस तरह अल्लाह तआला ने इस दुनिया को पैदा किया है उसी

2013/05/17  23:35

कभी ऐसा भी होता है।
काउंटर पर पहुँचते ही उसने अपना पासपोर्ट और टिकट निकाला और लगेज भी वज़न करने के लिये रख दिया। फिर बोर्डिंग कार्ड लेने के बाद सीधा इमीग्रेशन के लिये पहुँची और इमीग्रेशन चेक होते ही एक दुकान की तरफ़ गई जहाँ खाने पीने की काफ़ी चीज़ें थीं।....

2013/05/15  09:26

आइये हम भी पुल बनाएं
एक मेहनती और दयालू बाप जिसके दो बेटे थे। बाप दुनिया से चल बसा और बेटों के लिये विरासत में एक बाग़ छोड़ गया। कई वर्षों तक दोनों भाई हँसी ख़ुशी साथ साथ रहे लेकिन अचानक एक छोटे से बिगाड़ की वजह से आपस में लड़ पड़े।

2013/05/05  06:22

क्लास का पहला पाठ
टीचर नें अपना भारी भरकम थैला मेज़ पर रखा और शीशे का एक गिलास निकाल कर सबके सामने रख दिया। फिर कुछ मोटे पत्थर थैले से निकाले और ग्लास में डाल दिये, स्टूडेंट्स टीचर की इस हरकत को बड़े आश्चर्य से देखते रहे

2013/05/05  06:20

आख़री बार
एक बढ़ई जो बूढ़ा हो चुका था और अब काम छोड़कर घर में आराम करना चाहता था। कम्पनी के मालिक के पास आया और बोला: मैं अब काम छोड़ना चाहता हूँ अगर आप आज्ञा दें तो मैं घर पर अपने बीवी बच्चों के साथ ज़िन्दगी के आख़िरी पल गुज़ारूँ

2013/05/05  06:19

हासिद (ईर्ष्या करने वाला) क्या करता है?
दूसरों से जलने वाला क्या करता है? वह पहले तो सामने वाले जैसा बनने की कोशिश करता है, जब नही बन पाता तो फिर अपने सामने वाले को कम करने की कोशिश करता है........

2013/03/10  23:02

सुप्रीम लीडर के बयान की रौशनी में
इस्लामी संस्कृति में जिहाद का अर्थ
इस्लामी कल्चर में जेहाद एक बहुत ही महत्वपूर्ण चीज़ है जो रसूलुल्लाह स.अ. के ज़माने में और इस्लाम का मैसेज आम होने के बाद ज़्यादा प्रचलित था......

2013/03/01  23:50

वेस्ट का इस्लामो फ़ोबिया और मुस्लिम मुल्कों का रिऐक्शन
आज दुनिया का नक़्शा कुछ इस तरह़ का है कि लगभग 57 मुसलमान मुल्क हैं लगभग 25 ईसाई मुल्क हैं और केवल एक यहूदी मुल्क है। इसके अलावा चीन और जापान, श्रीलंका, थाईलैण्ड समेत लगभग 10 बुद्धिस्ट मुल्क हैं.........

2013/03/01  23:38

पश्चिमी समाज मे औरत का शोषण (4)
पूंजीवाद पर आधारित सिस्टम तेज़ी के साथ वर्ल्ड लेविल पर भौतिकवादी सोच के साथ क़ब्ज़ा कर चुका है, एक ऐसे समाज मे जहां लग-भग सबकी सोच पैदावार, सपलाई, खपत और दौलत के फ़ायदे के चारों ओर घूमती हो,

2013/02/25  23:46

सुप्रीम लीडर के बयान की रौशनी में
पश्चिमी कल्चर में औरत की हैसियत
अगर आप पश्चिम को औऱ पश्चिमी कल्चर को समझना चाहें तो उनके नारों से नहीं समझ सकते हैं, पश्चिमी कल्चर को उसके लिटरेचर से समझा जा सकता है.......

2013/02/22  23:57

पश्चिमी समाज मे औरत का शोषण (3)
पश्चिमी माहौल के मुक़ाबले में जब हम पूर्बी समाजी माहौल की जांच पड़ताल करते हैं तो आम तौर पर दो तरह के लोग दिखाई देते हैं

2013/02/21  21:30

पश्चिमी समाज मे औरत का शोषण (2)
पहले जो घरों मे चैन और सेफ़्टी का माहौल देखने को मिलता था वह घर के लोगों ख़ासतौर से पति पत्नी के बीच मुहब्बत और अट्रैक्शन व आकर्षण को बढ़ावा देने की वजह बनता था

2013/02/20  23:29

पश्चिमी समाज मे औरत का शोषण (1)
यूरोप में औरत एक गुड़िया की तरह रह गई थी बल्कि अगर यह कहा जाए कि समाज में वह एक ग़ुलाम या नौकर की तरह थी तो ग़लत नहीं होगा, कई आन्दोलन उसको अपने पति की ग़ुलामी और उस वातावरण मे उसके पिछड़ेपन से बाहर निकालने के लिए शुरू किए गए

2013/02/17  23:42

सुप्रीम लीडर के बयान की रौशनी में
औरत इस्लाम की नज़र में (2)
इस्लाम इन्सान को मानवता, इन्सानियत, उसकी असलियत और आध्यात्मिकता की चोटी तक पहुँचाता है इसलिये इस्लाम की नज़र में मर्द और औरत में कोई अन्तर नहीं है........

2013/02/15  00:02

सुप्रीम लीडर के बयान की रौशनी में
औरत इस्लाम की नज़र में (1)
अरब के उस ज़माने में जब हर तरफ़ जिहालत और गवार पन था और औरत सुसाइटी के लिये एक कलंक समझी जाती थी.....

2013/02/14  23:51

ईरान का इस्लामी इंक़ेलाब सुप्रीम लीडर की ज़बानी
ईरान के इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने 14 जनवरी 1984 को इस्लामी इंक़ेलाब की सालगिरह के दस दिवसीय समारोह "अशरए फ़ज्र" के दिनों में एक प्रेस रिपोर्टर को इंटरव्यू देते हुए इस्लामी इंक़ेलाब की कामयाबी के दिनों की यादों का ताजा करते हुए कहा:

2013/02/14  23:46

ईरान का इस्लामी इंक़ेलाब सुप्रीम लीडर की ज़बानी
ईरान के इस्लामी इंक़ेलाब के सुप्रीम लीडर हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने 14 जनवरी 1984 को इस्लामी इंक़ेलाब की सालगिरह के दस दिवसीय समारोह "अशरए फ़ज्र" के दिनों में एक प्रेस रिपोर्टर को इंटरव्यू देते हुए इस्लामी इंक़ेलाब की कामयाबी के दिनों की यादों का ताजा करते हुए कहा:

2013/02/12  23:51

सुप्रीम लीडर के बयान की रौशनी में
नबी की सीरत (चरित्र) हर ज़माने की ज़रूरत
आज हमारी क़ौम को पैग़म्बरे अकरम स. की सीरत, उनके अख़लाक़, उनके बताए हुए रास्ते, उनके चरित्र, उनके मैसेज, उनके निर्देशन और उनकी उस रहमत की ज़रूरत है जिसके द्वारा आपने इन्सानों को मुहब्बत, भाई चारे और इन्सानियत की शिक्षा दी

2013/02/01  23:57

एकता का अर्थ, सुप्रीम लीडर के बयान की रौशनी में
जब हम मुसलमानों के बीच एकता की बात करते हैं तो हमें पता होना चाहिये कि इस एकता का क्या मतलब है। इसका मतलब बिल्कुल साधारण और साफ़ है

2013/02/01  23:57

दुरूद पढ़ने का तरीक़ा
यह एक निश्चित और तय बात है कि खुद पैग़म्बरे इस्लाम (स.अ) ने मुसलमानों को दुरुद पढ़ने का यह तरीक़ा सिखाया है जिस समय यह आयत नाज़िल हुई तो मुसलमानों ने हज़रत (स.) से पूछा: हम कैसे दरुद पढ़ें?

2013/01/16  23:58

लोगों के बीच सुलह सफ़ाई कराने का सवाब
लोगों के बीच सुलह सफ़ाई कराने का अल्लाह तआला ने हुक्म दिया है और अल्लाह के पैग़म्बरों की भी एक ज़िम्मेदारी थी कि समाज में मतभेदों को दूर करते हुए शांति बनाए रखें और इस रास्ते में किसी भी कोशिश से वह पीछे नहीं रहे।

2013/01/16  23:58

28 सफ़रः
28 सफ़र रसूले इस्लाम स. और इमाम हसन अ. की शहादत
इलाही पैग़म्बरों की एक अहेम ज़िम्मेदारी जेहालत, बेदीनी, अंध विश्वास के विरुद्ध संघर्ष और अन्याय, ज़ुल्म और मानवाधिकारों के हनन के ख़ेलाफ़ आंदोलन छेड़ना था।

2013/01/11  23:58

28 सफ़रः
28 सफ़र दो महान हस्तियों के ग़म मनाने का दिन
इमाम हसन अलैहिस्सलाम की शहादत और अल्लाह के भेजे हुए आख़री नबी यानि उनके नाना पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही वसल्लम के इस दुनिया से कूच करने की तारीख़ एक ही है।

2013/01/11  23:58

सजना सवंरना दीन की निगाह में
आजकल बहुत कम ऐसे लोग मिलेंगें जो घर से निकलते टाइम एक निगाह आइने पर न करते हों, कपड़ों का सेट होना, ज़ाहिरी हुलिया का आम लोगों की बीच जाते समय ठीक ठाक करना एक आदत और आम चलन बन गया है....

2013/01/09  21:53

मोहम्मद अली जावेदानः
हम इसी समय क़यामत में हैं मगर हमारी आँखों के सामने परदे हैं।
हम सोचते हैं कि दुनिया अस्ल है और बाक़ी सारी चीज़ें उसके चारो ओर घूम रही हैं लेकिन अस्ल और वास्तविकता केवल क़यामत है और हम इस समय क़यामत में हैं लेकिन हमारी आखों पर परदे पड़े हैं और इसी कारण हम इसे देख नहीं पा रहे हैं। क़ुरआने करीम फ़रमाता है .....

2013/01/03  22:37


   
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